बुधवार, 20 मई 2026

गीत

जन्मों का यह प्रेम प्यार, ,प्रिय  मत करना  तुम इनकार।

ले  चल मोहन नदिया पार।पाए  जीवन का  सत सार।।

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साथ   तेरा   सुंदर   पाकर।  तनमन वृंदावन बन जाए।।

वीराने गुमसुम जीवन  में, एक  बहार मनमोहक आए।।

पाऊं   तेरा   प्रेम   अपार, प्रिय मत करना  तुम इनकार।

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मन  में  फूलों का  डेरा  हो।तेरी  बाहों   का  घेरा   हो।। 

प्यारे मनोहर   जीवन  में। अब से एक नया सवेरा हो।।

आपस  में  भेद न तकरार, करू तुमसे  आज  मनुहार।

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मेरे  होठों  पर    नाम  हो।इस  मन  में तेरा  मुकाम हो।।

हो न कभी आनंद की शाम,जीवन में हरक्षण श्याम हो।।

फिर बजे मनकी मधुर सितार.,सुन ले मेरे प्रिय रखवार।

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तुझे छूकर चंदन हो जाऊं।मैं मोहक निधिवन हो जाऊं।।

नित पाऊं तेरी  चरण रज, मैं तुझमें ही लय हो जाऊं।।।

सुन मीत मोहन यह पुकार.,मुझे भला लगे यह सत्कार।

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तेरी  झील  सी आंखो  में, हरदम अपना रूप देखू  में।।

पा मोहक मनहर स्पर्श  प्रिए,तुझे मन  मन  मैं लेखु मैं।।

पाकर सुंदर नेह संसार, तुझे  छोड़ूं  नही  अब  करतार।

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निश्छल  होगा प्रेम  हमारा।एक दूजे में  विलय हमारा।।

सूरज  तारा अवनी अंबर ,देखेगे अदभुत प्रणय हमारा।।

ज्यों सागर में सरिता धार. करलो जी मुझे प्रभु स्वीकार।

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गीतकार मनोहर सिंह चौहान मधुकर

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