ले चल मोहन नदिया पार।पाए जीवन का सत सार।।
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साथ तेरा सुंदर पाकर। तनमन वृंदावन बन जाए।।
वीराने गुमसुम जीवन में, एक बहार मनमोहक आए।।
पाऊं तेरा प्रेम अपार, प्रिय मत करना तुम इनकार।
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मन में फूलों का डेरा हो।तेरी बाहों का घेरा हो।।
प्यारे मनोहर जीवन में। अब से एक नया सवेरा हो।।
आपस में भेद न तकरार, करू तुमसे आज मनुहार।
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मेरे होठों पर नाम हो।इस मन में तेरा मुकाम हो।।
हो न कभी आनंद की शाम,जीवन में हरक्षण श्याम हो।।
फिर बजे मनकी मधुर सितार.,सुन ले मेरे प्रिय रखवार।
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तुझे छूकर चंदन हो जाऊं।मैं मोहक निधिवन हो जाऊं।।
नित पाऊं तेरी चरण रज, मैं तुझमें ही लय हो जाऊं।।।
सुन मीत मोहन यह पुकार.,मुझे भला लगे यह सत्कार।
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तेरी झील सी आंखो में, हरदम अपना रूप देखू में।।
पा मोहक मनहर स्पर्श प्रिए,तुझे मन मन मैं लेखु मैं।।
पाकर सुंदर नेह संसार, तुझे छोड़ूं नही अब करतार।
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निश्छल होगा प्रेम हमारा।एक दूजे में विलय हमारा।।
सूरज तारा अवनी अंबर ,देखेगे अदभुत प्रणय हमारा।।
ज्यों सागर में सरिता धार. करलो जी मुझे प्रभु स्वीकार।

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