शनिवार, 7 मई 2011

जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे

देश का नया रिएलिटी शो, तोड़ गया रिकॉर्ड सारे,
शो का नाम था जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे।
शो के हर आइटम हिट थे,
क्योंकि एक ही शो में कई शो फिट थे।
चैनल वालों की बांछें खिल गई,
दिल्ली बिग बॉस की कुर्सी हिल गई।
खतरों के खिलाड़ी, नेताओं का रंग उड़ गया,
बबा रामदेव के आसन में एक और आसन अन्ना आसन जुड़ गया।
अन्ना आसन का अर्थ, अन्न को ना कहो, भूखे रहो।
इसमें ना हवा को लिया जाता है, ना छोड़ा जाता है,
इसमें हवा का रुख हितों के हिसाब से मोड़ा जाता है।
आसन का प्रभाव बाबा खुद जांच रहे थे,
तभी तो आसन के दौरान, डीआईडी स्टाइल में नाच रहे थे।
ना सुर, ना ताल, ना बोल,
एक बाबा इंडियन आइडल, अपनी परफॉरमेंस दे रहे थे।
आत्मा और परमात्मा में घोटालों का रेफरेंस दे रहे थे।
भाषा की अग्नि की, आवेश की, वेल्यू थी फेस की।
इस वेल्यू से सबको धो गए थे।
संत के भेष में सिलेब्रिटी हो गए थे।
शो को बनाना था सनसनीखेज,
महिला पुलिस की तेज-तर्रार इमेज।
लाठी की जगह भाषण बरसा रही थी,
आपकी कचहरी अन्ना की अदालत में लगा रही थी।
फैसला पहले से फिक्स था,
ये चुलबुल पांडे के साथ मुन्नी बदनाम का नया रीमिक्स था।
सब लोग थे रेलमपेल में,
संाप सीढ़ी के खेल में।
एक भूषण सीढ़ी पर चढ़े, फिर उतरे, फिर सीडी शिकंजे ने कस लिया,
निन्यानवे के फेर में, निन्यानवे में आ के समाजवादी सांप ने डस लिया।
लेकिन लाइफ लाइन बच गई,
हॉट सीट जच गई।
करोड़ों की संपत्ति भी अति,
सबको पता है कौन बनेगा करोड़पति।
बच्चे, बूढ़े, जवान सब में करंट था,
ये चैनल पर चहरों का टैलेंट हंट था।
एक चेहरे से पूछा, ये भ्रष्टाचार क्या होता है?
वो बोला कुछ नहीं सुविधाजनक समझौता है।
जिसके विरोध में शोर है,
सुविधा अपनी हो तो बात कुछ और है।
दूसरे से पूछा ये लोकपाल बिल क्या होता है?
वो बोला जब लोक को पालने वाला बिल में सोता है।
हम उसे जगा रहे हैं।
बिल में चूहा नहीं भैंस है,
भैंस के आगे बीन बजा रहे हैं।
हम समझ गए ये सरकार को भैंस कह रहा है, और भैंस को सरकार।
दोनों ऐंठ गई, अन्ना हजारे क्या उठे, भैंस बैठ गई।
भैंस के बैठने के बाद, सब कर रहे हैं फरियाद,
बाबा बैठो, लेटो, कुछ तो करो, जियो या मरो,
क्योंकि हम जानते हैं, हमारी ये तमन्ना है,
पीपली लाइव का नत्था अपना प्यारा अन्ना है।
नेशनल नेटवर्क का सबसे बड़ा कवरेज है,
ईमानदारी का अंतिम दस्तावेज है,
आजाद भारत का चमत्कार है।
हमें इस शो के सीजन टू का इंतजार है।
यह रचना टीवी रियेलिटी शो लाफ्टर चैलेंज फेम व जाने-माने हास्य-व्यंग्य कवि श्री रास बिहारी गौड़ की है।
उनका संपर्क सूत्र है:-09680073007

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति!

    आज भ्रष्टाचार की शिकायत करने पर आपके सारे काम रोक दिए जाते हैं और आपको सारे भ्रष्टाचारी एकत्रित होकर आपका शोषण करने लग जाते हैं. ऐसा मेरा अनुभव है, अभी 5 मई 2011 को तीस हजारी की लीगल सैल में मेरे साथ बुरा बर्ताव हुआ और सरकारी वकील ने जान से मारने की धमकी पूरे स्टाफ के सामने दी थीं, क्योंकि इन दिनों बीमार चल रहा हूँ. इसलिए फ़िलहाल इसकी उच्च स्तर पर शिकायत करने में असमर्थ हूँ. लेकिन भ्रष्टाचारियों के हाथों मरने से पहले 10-20 भ्रष्टों को लेकर जरुर मरूँगा. आप सभी को यह मेरा वादा है. सरकारी वकील की शिकायत क्यों करनी पड़ी इसको देखने के लिए उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से देखे. अगर मुझे थोडा-सा साथ(ब्लॉगर भाइयों का ही) और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ क्योंकि अपने 17 वर्षीय पत्रकारिता के अनुभव के आधार पर कह रहा हूँ कि-अब प्रिंट व इलेक्टोनिक्स मीडिया में अब वो दम नहीं रहा. जो उनकी पहले हुआ करता हैं. लोकतंत्र के तीनों स्तंभ के साथ-साथ चौथे स्तंभ का भी नैतिक पतन हो चुका है. पहले पत्रकारिता एक जन आन्दोलन हुआ करती थीं. अब चमक-दमक के साथ भौतिक सुखों की पूर्ति का साधन बन चुकी है. यानि पत्रकारिता उद्देश्यहीन होती जा रही है.

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  2. vyangya me wo khasiyat hoti hai...jo bura bhi nahi lagta par sab kuchh kah jate hain...sach me aisa hi ho raha hai..!!

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